Margashirsha Purnima: आज है इस साल का अंतिम पूर्णिमा, जानें इसके महत्व एवं पूजन विधि

1 month ago 16

मार्गशीर्ष पूर्णिमा: पूर्णिमा का दिन बहुत पवित्र होता है। यह माना जाता है कि इस दिन की गई प्रार्थना कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है। पूर्णिमा की तिथि को पूर्णता की तिथि माना जाता है। इस तिथि को चंद्रमा पूर्ण होता है और सूर्य और चंद्रमा विषुव होते हैं। इस तिथि पर विशेष ऊर्जा पानी और वातावरण में प्रवेश करती है। इस दिन स्नान, दान और ध्यान विशेष रूप से फलदायी होते हैं। चंद्रमा इस तिथि का स्वामी है, इसलिए इस दिन सभी प्रकार की मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। साल की आखिरी पूर्णिमा 30 दिसंबर को है

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व

पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा, पृथ्वी और जल तत्व को पूरी तरह से प्रभावित करता है। इस दिन को देवत्व का दिन माना जाता है। इसे महीने के सबसे पवित्र महीने का आखिरी दिन कहा जाता है। इस दिन ध्यान, दान और स्नान विशेष रूप से लाभकारी होते हैं। इस दिन श्री हरि या शिव की पूजा की जानी चाहिए। मान्यताओ के अनुसार इस दिन चंद्रमा को अमृत से सिंचित किया गया था, इसलिए इस दिन चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।

इस पूर्णिमा को क्या कहती है ग्रहों की स्थिति

इस बार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मिथुन राशि में मौजूद होगा। धन और सुरक्षा कारक मंगल को अच्छी स्थिति में रखेंगे। शुक्र मंगल के राशि में और साथ ही मंगल के प्रभाव में होगा जिसके कारण आकर्षण, प्रेम और आनंद की बौछार होगी। इस पूर्णिमा को स्नान और दान करने से चंद्रमा के बुरे परिणाम से राहत मिलेगी। परिणामस्वरूप, आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

पूर्णिमा के दिन स्नान और ध्यान करने की विधि

सुबह स्नान करने से पहले एक संकल्प करें और पानी में तुलसी के पत्ते डालें। पहले सिर पर पानी लगाएं और फिर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें। सादे एवं साफ कपड़े पहनकर ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें। मंत्र का जाप करने के बाद सफेद वस्तुओं और पानी का दान करें। रात को चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें। आप चाहें तो इस दिन जल और फल लेकर उपवास कर सकते हैं।